नागालैंड का भूगोल

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नागालैंड का भूगोल

नागालैंड, जिसे अक्सर "भारत का सुदूर पूर्व" कहा जाता है, अपनी ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों, गहरी घाटियों और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। भौगोलिक दृष्टि से यह राज्य बहुत ही जटिल और सुंदर संरचना वाला है।

नीचे नागालैंड के भूगोल पर एक विस्तृत लेख दिया गया है:

1. भौगोलिक स्थिति और सीमाएं

नागालैंड भारत के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित एक पहाड़ी राज्य है।

  • अक्षांश और देशांतर: यह $25.6^\circ \text{N}$ से $27.4^\circ \text{N}$ अक्षांश और $93.20^\circ \text{E}$ से $95.15^\circ \text{E}$ देशांतर के बीच स्थित है।

  • क्षेत्रफल: इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 16,579 वर्ग किमी है।

  • पड़ोसी: * उत्तर में: अरुणाचल प्रदेश

  • दक्षिण में: मणिपुर
  • पश्चिम में: असम
  • पूर्व में: म्यांमार (बर्मा) के साथ एक लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करता है।

2. भू-आकृति (Topography)

नागालैंड का लगभग पूरा हिस्सा पहाड़ी है। यहाँ की पहाड़ियाँ 'पटकाई पर्वत श्रृंखला' (Patkai Range) का हिस्सा हैं, जो हिमालय तंत्र का ही विस्तार है।

  • पर्वत श्रृंखलाएं: ये पहाड़ियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर फैली हुई हैं। असम की सीमा के पास की पहाड़ियाँ कम ऊँची हैं, लेकिन म्यांमार की ओर जाने पर इनकी ऊँचाई बढ़ती जाती है।
  • माउंट सारामती (Mount Saramati): यह नागालैंड की सबसे ऊँची चोटी है, जिसकी ऊँचाई समुद्र तल से 3,840 मीटर है। यह चोटी म्यांमार सीमा पर स्थित है और सर्दियों में अक्सर बर्फ से ढकी रहती है।
  • घाटियाँ: पहाड़ियों के बीच में छोटी-छोटी उपजाऊ घाटियाँ हैं जहाँ खेती की जाती है।

3. जल निकासी प्रणाली (River System)

नागालैंड की नदियों को उनके बहाव के आधार पर दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:

  1. ब्रह्मपुत्र बेसिन: अधिकांश नदियाँ पश्चिम की ओर बहती हुई असम के रास्ते ब्रह्मपुत्र में मिल जाती हैं। इनमें दोयांग (Doyang), धनसिरी (Dhansiri), और दिखु (Dikhu) प्रमुख हैं। दोयांग राज्य की सबसे लंबी नदी है।
  2. चिंदविन बेसिन: पूर्वी हिस्से की कुछ नदियाँ, जैसे तिज़ू (Tizu), म्यांमार की ओर बहती हैं और चिंदविन नदी में मिल जाती हैं।

4. जलवायु (Climate)

नागालैंड की जलवायु काफी हद तक इसकी ऊँचाई पर निर्भर करती है।

  • ग्रीष्म ऋतु: यहाँ गर्मियाँ मध्यम होती हैं। तापमान $16^\circ \text{C}$ से $31^\circ \text{C}$ के बीच रहता है।
  • शीत ऋतु: पहाड़ियों पर कड़ाके की ठंड पड़ती है। ऊँचे इलाकों में तापमान $4^\circ \text{C}$ से नीचे चला जाता है और पाला (Frost) गिरना आम है।
  • वर्षा: यहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून से भारी वर्षा होती है। औसत वार्षिक वर्षा 2,000 मिमी से 2,500 मिमी के बीच होती है।

5. मृदा और कृषि (Soil and Agriculture)

नागालैंड की मिट्टी मुख्य रूप से बादामी और लाल रंग की (Laterite soil) है, जो अम्लीय प्रकृति की होती है।

  • झूम खेती (Jhum Cultivation): यहाँ की अधिकांश जनजातियाँ पारंपरिक 'स्थानांतरित कृषि' या झूम खेती करती हैं। इसमें जंगलों को जलाकर खेती की जाती है।
  • सीढ़ीनुमा खेती (Terrace Farming): कोहिमा और फेक जिलों में 'सीढ़ीनुमा खेती' (पगड़ी खेती) का शानदार उदाहरण देखने को मिलता है, जहाँ ढलानों को काटकर खेत बनाए जाते हैं।

6. वनस्पति और जीव (Flora and Fauna)

नागालैंड का लगभग 52% हिस्सा वनों से ढका हुआ है।

  • वन: यहाँ उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय सदाबहार वन पाए जाते हैं। यहाँ ताड़, बाँस, और महोगनी के पेड़ प्रचुर मात्रा में हैं।
  • राज्य पशु: मिथुन (Mithun) यहाँ का राजकीय पशु है, जो गौर जैसा दिखता है और नागा संस्कृति में बहुत महत्व रखता है।
  • हॉर्नबिल: 'हॉर्नबिल' यहाँ का प्रसिद्ध पक्षी है, जिसके नाम पर यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव भी मनाया जाता है।
  • अमूर फाल्कन: नागालैंड को "दुनिया की फाल्कन राजधानी" कहा जाता है, क्योंकि यहाँ लाखों की संख्या में प्रवासी अमूर फाल्कन पक्षी आते हैं।

निष्कर्ष

नागालैंड का भूगोल चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहाँ की ऊँची चोटियाँ और गहरी घाटियाँ न केवल इसके सामरिक महत्व को बढ़ाती हैं, बल्कि यहाँ की अनूठी जनजातीय संस्कृति के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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