आज 21 फरवरी है, यानी अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day)। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी अपनी भाषा सिर्फ संवाद का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पहचान और इतिहास का हिस्सा है।
यहाँ इस दिन से जुड़ी कुछ खास बातें दी गई हैं:
1. यह क्यों मनाया जाता है?
इस दिन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना और बहुभाषावाद (Multilingualism) को प्रोत्साहित करना है। यूनेस्को (UNESCO) के अनुसार, दुनिया की लगभग 6,000 भाषाओं में से 40% लुप्त होने की कगार पर हैं, इसलिए उन्हें बचाना ज़रूरी है।
2. इसका इतिहास (1952 का संघर्ष)
इस दिवस को मनाने के पीछे एक गहरा और भावुक इतिहास है:
* 1952 में, तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में 'ढाका विश्वविद्यालय' के छात्रों ने अपनी मातृभाषा 'बांग्ला' को आधिकारिक दर्जा दिलाने के लिए एक बड़ा आंदोलन किया था।
* 21 फरवरी 1952 को पुलिस की फायरिंग में कई छात्र शहीद हो गए। उनकी शहादत की याद में ही इस दिन को चुना गया।
* यूनेस्को ने 1999 में इसे मनाने की घोषणा की और 2000 से इसे पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा।
3. भारत के संदर्भ में महत्व
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश के लिए यह दिन बहुत खास है:
* भारत में सैकड़ों भाषाएं और हजारों बोलियां बोली जाती हैं।
* नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में भी प्राथमिक शिक्षा को मातृभाषा में देने पर जोर दिया गया है, ताकि बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और बेहतर तरीके से सीख सकें।
4. इस वर्ष की प्रासंगिकता
आधुनिक दौर में जब अंग्रेजी या अन्य वैश्विक भाषाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, मातृभाषा दिवस हमें सिखाता है कि:
* अपनी मातृभाषा बोलने में गर्व महसूस करें।
* नई पीढ़ी को अपनी स्थानीय भाषा और लोककथाओं से जोड़ें।
* मातृभाषा में शिक्षा और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दें।
> "जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता।" — डॉ. राजेंद्र प्रसाद
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