सांख्यिकी (Statistics) में मध्यिका (Median) केंद्रीय प्रवृत्ति का एक ऐसा माप है, जो किसी समंक श्रेणी (Data series) को दो बराबर भागों में विभाजित करता है।
1. मध्यिका की परिभाषा
जब किसी समंक श्रेणी को उसके मूल्यों के अनुसार आरोही (Ascending) या अवरोही (Descending) क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो उस श्रेणी के मध्य में आने वाला मान 'मध्यिका' कहलाता है।
- मध्यिका से आधे मान कम होते हैं और आधे मान अधिक।
- इसे संकेत में $M$ या $M_d$ से प्रदर्शित किया जाता है।
2. मध्यिका ज्ञात करने की विधि
मध्यिका ज्ञात करने के लिए सबसे पहले आँकड़ों को क्रमबद्ध (Sort) करना अनिवार्य है। इसके बाद गणना दो स्थितियों पर निर्भर करती है:
(A) व्यक्तिगत श्रेणी (Individual Series)
यदि पदों की कुल संख्या $n$ है:
- यदि $n$ विषम (Odd) हो:
$$M = \left( \frac{n+1}{2} \right) \text{ वें पद का मान}$$
उदाहरण: 5, 7, 9 में मध्यिका $\frac{3+1}{2} = 2$ वां पद (7) है।
- यदि $n$ सम (Even) हो:
$$M = \frac{\left( \frac{n}{2} \right) \text{ वां पद } + \left( \frac{n}{2} + 1 \right) \text{ वां पद }}{2}$$
अर्थात् मध्य के दो पदों का औसत।
(B) सतत श्रेणी (Continuous Series)
- वर्गीकृत आँकड़ों के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है:
$$M = L + \left( \frac{\frac{N}{2} - cf}{f} \right) \times h$$
$L$ = मध्यिका वर्ग की निचली सीमा
$N$ = कुल आवृत्ति (Total Frequency)
$cf$ = मध्यिका वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की संचयी आवृत्ति
$f$ = मध्यिका वर्ग की आवृत्ति
$h$ = वर्ग अंतराल (Class Interval)
3. मध्यिका के गुण (Merits)
- सरलता: इसे समझना और गणना करना बहुत आसान है। कई बार तो केवल देखकर ही मध्यिका का पता लगाया जा सकता है।
- चरम मूल्यों का प्रभाव नहीं: औसत (Mean) की तुलना में मध्यिका पर बहुत छोटे या बहुत बड़े मूल्यों (Extreme values) का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- बिंदु-रेखा चित्र: मध्यिका को तोरण वक्र (Ogive Curve) की सहायता से ग्राफीय रूप में ज्ञात किया जा सकता है।
- गुणात्मक तथ्यों के लिए उपयुक्त: जहाँ आँकड़ों को मापा नहीं जा सकता (जैसे बुद्धिमत्ता, सुंदरता, ईमानदारी), वहाँ मध्यिका सबसे अच्छा माप है।
4. मध्यिका के दोष (Demerits)
- क्रमबद्धता की आवश्यकता: गणना से पहले आँकड़ों को क्रम में सजाना पड़ता है, जिसमें समय लगता है।
- सभी मूल्यों पर आधारित नहीं: मध्यिका केवल मध्य पद पर निर्भर करती है, यह श्रेणी के सभी पदों के मूल्यों को महत्व नहीं देती।
- बीजीय विवेचन का अभाव: माध्य (Mean) की तरह इसका आगे गणितीय गणनाओं में अधिक प्रयोग नहीं किया जा सकता।
- नमूना परिवर्तन का प्रभाव: यदि प्रतिदर्श (Sample) में थोड़ा भी बदलाव हो, तो मध्यिका का मान काफी बदल सकता है।
मध्यिका (Median) को समझने के लिए आइए इसे तीन अलग-अलग स्थितियों में उदाहरण के माध्यम से देखते हैं:
1. व्यक्तिगत श्रेणी (विषम संख्या / Odd Number)
जब पदों की संख्या विषम हो, तो मध्य पद सीधे मिल जाता है।
उदाहरण: 5 छात्रों के प्राप्तांक इस प्रकार हैं: $15, 25, 10, 30, 20$। मध्यिका ज्ञात कीजिए।
- चरण 1: आरोही क्रम (Ascending Order) में व्यवस्थित करना:
$10, 15, 20, 25, 30$
- चरण 2: पदों की संख्या ($n$): $5$ (जो कि विषम है)
- चरण 3: सूत्र का प्रयोग:
$$M = \left( \frac{n+1}{2} \right) \text{ वां पद }$$
$$M = \left( \frac{5+1}{2} \right) = 3 \text{ वां पद }$$
उत्तर: तीसरा पद 20 है, अतः मध्यिका $20$ होगी।
2. व्यक्तिगत श्रेणी (सम संख्या / Even Number)
जब पदों की संख्या सम हो, तो बीच के दो पदों का औसत लिया जाता है।
उदाहरण: 6 छात्रों के प्राप्तांक: $12, 18, 10, 14, 22, 16$।
- चरण 1: आरोही क्रम:
$10, 12, 14, 16, 18, 22$
- चरण 2: पदों की संख्या ($n$): $6$ (सम)
- चरण 3: सूत्र का प्रयोग:
बीच के दो पद $14$ और $16$ हैं।
$$M = \frac{14 + 16}{2} = \frac{30}{2}$$
उत्तर: मध्यिका 15 होगी।
3. सतत श्रेणी (Continuous Series) - वर्गीकृत आँकड़े
यह बोर्ड परीक्षाओं और उच्च कक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
उदाहरण: निम्नलिखित आँकड़ों की मध्यिका ज्ञात कीजिए:
| वर्ग अंतराल (Class) | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (cf) |
| 0 - 10 | 4 | 4 |
| 10 - 20 | 6 | 10 |
| 20 - 30 (M Class) | 10 | 20 |
| 30 - 40 | 5 | 25 |
गणना:
- कुल आवृत्ति ($N$): $25$
- मध्यिका पद: $\frac{N}{2} = \frac{25}{2} = 12.5$
- $12.5$ संचयी आवृत्ति 20 के अंतर्गत आता है। अतः मध्यिका वर्ग 20 - 30 है।
- मान: $L = 20$, $cf = 10$ (पिछले वर्ग की $cf$), $f = 10$, $h = 10$ (अंतराल)।
सूत्र:
$$M = L + \left( \frac{\frac{N}{2} - cf}{f} \right) \times h$$
$$M = 20 + \left( \frac{12.5 - 10}{10} \right) \times 10$$
$$M = 20 + 2.5$$
उत्तर: मध्यिका 22.5 है।
याद रखने योग्य सूत्र (शॉर्टकट)
| श्रेणी | स्थिति | सूत्र |
| व्यक्तिगत | विषम ($n$) | $\frac{n+1}{2}$ वां पद |
| व्यक्तिगत | सम ($n$) | $\frac{\text{बीच के दो पदों का योग}}{2}$ |
| सतत | वर्गीकृत | $L + \frac{\frac{N}{2} - cf}{f} \times h$ |
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