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मणिपुर के परिधान
मणिपुर की संस्कृति की तरह ही यहाँ के पारंपरिक परिधान भी अपनी शालीनता, रंगों के अनूठे संयोजन और बारीक बुनाई के लिए जाने जाते हैं। मणिपुर के परिधानों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है: मैतेई (Meitei) समुदाय के वस्त्र और पहाड़ी जनजातियों (नागा और कुकी) के वस्त्र।
यहाँ मणिपुर के प्रमुख परिधानों पर एक विस्तृत लेख प्रस्तुत है:
1. महिलाओं के पारंपरिक परिधान
मणिपुरी महिलाओं के वस्त्र उनकी सुंदरता और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक हैं।
क. फनेक (Phanek)
यह मणिपुर का सबसे प्रसिद्ध और मुख्य महिला परिधान है। यह एक प्रकार की 'रैप-अराउंड' स्कर्ट (Sarong) है जिसे कमर पर लपेटा जाता है।
- फनेक मयेक नैबी (Phanek Mayek Naibi): यह विशेष अवसरों पर पहनी जाने वाली फनेक है। इसके निचले हिस्से पर हाथ से बारीक कढ़ाई (पार्श्व पट्टियां) होती है।
- विशेषता: पारंपरिक फनेक आमतौर पर सूती या रेशम के धागों से बुनी जाती है और इसमें चटकीले रंगों का उपयोग होता है।
ख. इनाफी (Innaphi)
यह एक पारभासी और बहुत ही महीन ओढ़नी (Shawl) है जिसे फनेक के ऊपर कंधे पर लपेटा जाता है।
बनावट: इनाफी अपनी सूक्ष्म बुनाई के लिए जानी जाती है। पुराने समय में इसे छाल के रेशों से बनाया जाता था, लेकिन अब यह रेशम और बेहतरीन कपास से बनाई जाती है।
ग. पोटलोई (Potloi)
यह मणिपुर का सबसे शानदार और विश्व प्रसिद्ध परिधान है, जिसे मुख्य रूप से शादी और रासलीला नृत्य के दौरान पहना जाता है।
- आकार: यह एक कठोर, बेलनाकार (Cylindrical) संरचना वाला स्कर्ट होता है।
- सजावट: इसे भारी कढ़ाई, दर्पण के काम और सोने-चांदी के धागों से सजाया जाता है। इसके साथ पहनी जाने वाली मखमल की चोली (Blouse) इसे और भी भव्य बनाती है।
2. पुरुषों के पारंपरिक परिधान
मणिपुरी पुरुषों के वस्त्र सादगी और शुद्धता का प्रतीक माने जाते हैं।
क. खामेन चटपा (Khamen Chatpa)
यह एक विशेष प्रकार की धोती है जिस पर हाथ से ब्लॉक प्रिंटिंग की जाती है।
महत्व: प्राचीन काल में यह धोती केवल राजाओं, योद्धाओं और उन लोगों द्वारा पहनी जाती थी जिन्हें राजा द्वारा सम्मानित किया जाता था। आज भी इसे धार्मिक उत्सवों और विशेष अनुष्ठानों में पहना जाता है।
ख. धोती और कुर्ता
दैनिक जीवन और सामाजिक समारोहों में मणिपुरी पुरुष सफेद धोती और कुर्ता पहनना पसंद करते हैं। इसके साथ अक्सर सिर पर सफेद पगड़ी पहनी जाती है, जिसे 'कोयेट' (Koyet) कहा जाता है।
3. पहाड़ी जनजातियों के परिधान (Tribal Attire)
मणिपुर की विभिन्न जनजातियाँ (जैसे तांगखुल, काबुई, आदि) अपनी विशिष्ट बुनाई और पैटर्न वाले शॉल और वस्त्र पहनती हैं।
- शॉल: जनजातीय पुरुषों और महिलाओं के बीच शॉल बहुत महत्वपूर्ण हैं। हर जनजाति के शॉल का रंग और पैटर्न उनकी पहचान बताता है।
- सजावट: इन वस्त्रों पर अक्सर कौड़ियों, हड्डियों, और पक्षियों के पंखों का सुंदर उपयोग किया जाता है।
4. बुनाई और वस्त्रों की विशेषताएँ
| परिधान | मुख्य विशेषता | अवसर |
| पोटलोई | बेलनाकार और भारी सजावट | विवाह, रासलीला |
| फनेक | धारीदार पैटर्न वाली स्कर्ट | दैनिक और औपचारिक |
| इनाफी | पारभासी ओढ़नी | औपचारिक समारोह |
| खामेन चटपा | ब्लॉक प्रिंटेड धोती | धार्मिक उत्सव |
5. आभूषण (Ornaments)
मणिपुरी परिधानों का सौंदर्य पारंपरिक आभूषणों के बिना अधूरा है।
- मारेई (Marei): एक विशेष प्रकार का हार।
- खेयोक (Kheyok): मोतियों से बना हार।
- आभूषणों की सामग्री: यहाँ के आभूषणों में अक्सर सोने, पीतल और कीमती पत्थरों का उपयोग किया जाता है।
निष्कर्ष
मणिपुर के परिधान वहाँ की समृद्ध हथकरघा परंपरा का जीवंत उदाहरण हैं। जहाँ 'पोटलोई' यहाँ की कलात्मक भव्यता को दर्शाती है, वहीं 'फनेक' और 'इनाफी' यहाँ की महिलाओं की सादगी और सुसंस्कृत पहचान को प्रकट करते हैं। आधुनिक समय में भी मणिपुर के युवा अपने इन पारंपरिक परिधानों को बड़े गर्व के साथ अपनाते हैं।
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