आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षकगण एवं मेरे प्यारे सहपाठियों, आप सभी को मेरा सादर प्रणाम।
आज मुझे 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' अभियान के अंतर्गत हमारे देश के दो अत्यंत सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्यों—मेघालय और नागालैंड की संस्कृति पर अपने विचार साझा करने का सुअवसर मिला है।
भारत की खूबसूरती इसकी विविधता में है। जिस तरह एक सुंदर माला अलग-अलग रंगों और सुगंध वाले फूलों से मिलकर बनती है, ठीक उसी तरह हमारा भारत विभिन्न भाषाओं, वेशभूषाओं और परंपराओं के संगम से महान बनता है। जब हम पूर्वोत्तर भारत की बात करते हैं, तो हमारे मन में बादलों से घिरे पर्वत, हरे-भरे जंगल और लोक कलाओं की एक मनमोहक तस्वीर उभर आती है।
सबसे पहले बात करते हैं मेघालय की। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है—'मेघ' और 'आलय', यानी बादलों का घर। मेघालय अपनी बेमिसाल प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी अनूठी सामाजिक व्यवस्था के लिए भी जाना जाता है। यहाँ मुख्य रूप से खासी, जयंतिया और गारो जनजातियाँ निवास करती हैं। मेघालय की सबसे बड़ी विशेषता इसका मातृसत्तात्मक समाज है। यहाँ परिवार की वंश-परंपरा माता के नाम से चलती है और घर की सबसे छोटी बेटी को संपत्ति का मुख्य उत्तराधिकारी माना जाता है। यह व्यवस्था महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की एक मिसाल है।
मेघालय की प्रकृति के साथ समरसता का एक बड़ा उदाहरण यहाँ के जीवित जड़ पुल (Living Root Bridges) हैं। रबर के पेड़ों की जड़ों को जोड़कर बनाए गए ये पुल प्रकृति और मानव के गहरे तालमेल को दर्शाते हैं। यहाँ का 'वांगला' नृत्य, जिसे सौ ढोलों का त्योहार भी कहा जाता है, गारो समुदाय का प्रमुख उत्सव है। जब पारंपरिक वेशभूषा 'जैनसेम' पहने लोग संगीत की धुन पर थिरकते हैं, तो पूरा वातावरण उत्सव के रंग में रंग जाता है।
अब रुख करते हैं शौर्य, वीरता और उत्सवों की भूमि नागालैंड की ओर। नागालैंड को 'त्योहारों की भूमि' कहा जाता है। यहाँ 16 से अधिक प्रमुख जनजातियाँ रहती हैं, जैसे अंगामी, आओ, कोन्याक और सुमी। प्रत्येक जनजाति की अपनी विशिष्ट भाषा, रीति-रिवाज और बुनाई की कला है।
नागा समाज में समुदाय की भावना और आपसी सहयोग बहुत मजबूत होता है। यहाँ का हॉर्नबिल महोत्सव (Hornbill Festival) पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जिसे 'त्योहारों का त्योहार' भी कहा जाता है। इसमें सभी नागा जनजातियाँ अपनी पारंपरिक पोशाक, युद्ध नृत्य, लोकगीत और हस्तकला का एक साथ प्रदर्शन करती हैं। नागालैंड की पारंपरिक शॉल केवल एक वस्त्र नहीं है, बल्कि उसके रंग और पैटर्न व्यक्ति के सामाजिक सम्मान और उसकी जनजाति की पहचान को दर्शाते हैं। नागालैंड के लोग लकड़ी की नक्काशी और बांस के काम में निपुण होते हैं।
मेघालय और नागालैंड भले ही भौगोलिक दृष्टि से हमसे कुछ दूरी पर हों, लेकिन वे हमारी साझी भारतीय आत्मा का अभिन्न हिस्सा हैं। 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का उद्देश्य यही है कि हम एक-दूसरे के इतिहास, जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों को समझें और उनका सम्मान करें। मेघालय से हम प्रकृति का संरक्षण और महिलाओं का सम्मान सीख सकते हैं, तो नागालैंड से एकता, सामूहिकता और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश ले सकते हैं।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने देश की इस अद्भुत विविधता को संजोएंगे और भारत की एकता की डोर को और अधिक मजबूत बनाएंगे।
धन्यवाद। जय हिंद, जय भारत!
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